15 नवंबर 2012 - 20:30

ग़ज़्ज़ा के मज़लूम निवासियो का भाग्य कर्बला और इमाम हुसैन (अ.ह) से जुड़ा हुआ है चूंकि आज भी पूरे चार साल के बाद दूसरी बार वह मुहर्रम के आगमन पर जायोनी यज़ीदियों के हमलों का शिकार हुए हैं

अहलेबैत समाचार एजेंसी (अबना) की रिपोर्ट के अनुसार ग़ज़्ज़ा पर जायोनियों के हमले के जवाब में और वर्तमान समय के यज़ीदियों के अत्याचारों और कर्बला के आंदोलन की वर्षगांठ के संदर्भ में विश्व अहलेबैत (अ.) परिषद ने दुनिया भर के मुसलमानों और आज़ाद इंसानों को सम्बोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है।इस बयान में पिछली ग़ज़्ज़ा जंग की ओर कि जो 2008 (मुहर्रम 1429) में हुई थी, इशारा करते हुए कहा गया है मानो ग़ज़्ज़ा के मज़लूम निवासियो का भाग्य कर्बला और इमाम हुसैन (अ.ह) से जुड़ा हुआ है चूंकि आज भी पूरे चार साल के बाद दूसरी बार वह मुहर्रम के आगमन पर जायोनी यज़ीदियों के हमलों का शिकार हुए हैं।इस बयान में मुसलमानों से मांग की गई है कि वह प्रदर्शनों, रैलियों और अमेरिकी तथा पश्चिमी दूतावासों के सामने धरनों द्वारा इसी प्रकार बयान जारी करके, सच्चाई का खुलासा करने वाली कांफ़्रेंसे आयोजित करके और तस्वीरों की प्रदर्शनी लगा कर इन अत्याचारों पर अपना ऐतेराज़ दर्ज कराएं। بسم الله الرحمن الرحیمقال الله الحکیم: «و ما نقموا منهم الا ان یومنوا بالله العزیز الحمید».मुहर्रम पर सलाम, मज़लूमियत और शहादत का महीना, अभिमान व सम्मान का महीना, ख़ून की तलवार पर जीत का महीना...पैगम्बरे इस्लाम (स.अ.) के बेटे हज़रत इमाम हुसैन (अ.ह.) कि जिन्होंने ख़ून देकर इस्लाम को ज़िंदा किया और दुनिया भर के आज़ाद इंसानों के लिए आदर्श बन गए.....अब जबकि इस्लामी जगत देशद्रोही और ग़द्दार शासकों या अत्याचारी अमेरिका और धूर्त ब्रिटेन के किराए के मज़दूरों द्वारा बहरैन, सीरिया, पाकिस्तान और इराक़ की जनता के नाहक़ ख़ून बहने से आहत है और जब अहलेबैत (अ.) के मानने वाले मुहर्रम की अज़ादारी के लिए अपने को तय्यार कर रहे हैं, एक बार फिर ग़ज़्ज़ा में कर्बला की घटना दुहराई जा रही है।मानो ग़ज़्ज़ा के पीड़ित लोगों का भाग्य कर्बला की घटना और हज़रत इमाम हुसैन (अ.) से जुड़ा हुआ है चूंकि आज भी पूरे चार साल के बाद दूसरी बार वह मुहर्रम के आगमन पर जायोनी यज़ीदियों के हमलों का शिकार हुए हैं ग़ज़्ज़ा पट्टी पर जायोनियों के हमले इस हाल में शुरू हुए हैं और जारी हैं कि कुछ देश विशेष कर अमेरिका और इंगलैंण्ड ग़ासिब इस्राईल की हिमायत कर रहे हैं और फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के जवाब की निंदा कर रहे हैं और बहुत से स्वतंत्र देश और कुछ लोकतंत्र का ढोंग पीटने वाले देशों ने भी केवल सुस्त और ढ़ीली प्रतिक्रिया व्यक्त की है और बड़े अफ़सोस की बात है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक उसी तरह जैसा की उमीद की जा रही थी बिना किसी परिणाम के समाप्त हो गई।प्रतिक्रियावादी अरब शासनों ने भी जो अधिकतर जनांदोलनों के भय से पश्चिमी ताक़तों की गोद में पनाह लिए हुए हैं हमेशा की तरह अपनी ख़ामोशी से और दिखावटी तथा बेफ़ायदा कार्यवाहियों से  अपनी कार्य पुस्तिका पर एक और शर्मनाक पेज की बढ़ोतरी कर ली। अरब लीग जो सीरिया में हर झूठी सच्ची ख़बर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करता है और आतंकवादियों का समर्थन करता है केवल शाब्दिक रूप से और अपनी ज़िम्मेदारी निभा देने के लिए इन खुले हुए अत्याचारों की निंदा करता है लेकिन इस्राईल से सम्बंधों के ख़त्म करने और इस्राईली प्रोडक्ट्स पर पाबंदी को लेकर कोई प्रभावी और क्रियात्मक क़दम नहीं उठाता है।इन घटनाओं के जवाब में विश्व अहलेबैत (अ.ह.) परिषद जो करोड़ों मुसलमानों का धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है, एक अंतर-राष्ट्रीय संगठन होने के नाते दुनिया वालों का ध्यान निम्नलिखित बातों की ओर आकर्षित कर रहा है। 1. गज़्ज़ा के निहत्थे लोगों पर इस्राईल के हमलों ख़ास कर शहीद अहमद अल-जाबरी को आतंकवाद का निशाना बनाने की निंदा करते हुए सभी मुसलमानों बल्कि सभी आज़ाद इंसानों से मांग करते हैं कि सारे संभावित तरीक़ों से और विशेष रूप से निम्नलिखित तरीक़ों से इन अत्याचारों के विरूद्ध प्रतिक्रिया व्यक्त करें और इस तरह की कार्यवाहियों से दूरी की मांग करें।क) सबसे पहला और तत्कालीन कदम यह कि सारे मुसलमान कल नमाज़े जुमा में सम्मिलित हों  और नमाज़ के बाद प्रदर्शनों में शिरकत करें और जातिवादी जायोनी शासन और उसके समर्थकों ख़ास कर जालिम अमेरिका और कुछ ग़द्दार और खामोश तमाशाई बने अरब और ग़ैर अरब शासकों से अपनी नफ़रत का ऐलान करें।ख) अमेरिका और पश्चिमी देशों के दूतावासों के सामने इकठ्ठा होकर, इस्राईल के प्रति उनके समर्थन की निंदा करते हुए अमेरिका और पश्चिमी देशों से इस अत्याचारी शासनको कंट्रोल करने की मांग करें।ग) बयान जारी करके, व्यापक पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करके, धरने देकर उन ग़द्दार अरब और ग़ैर अरब शासनों के प्रति जो सीरियन सरकार के विरूद्ध कार्यवाहियां करके इस्राईल की मज़बूती और प्रतिरोध की कमज़ोरी का कारण बने हैं, ठोस क़दम उठाएं।घ) मुसलमान व ग़ैर मुसलमान विचारकों की मौजूदगी में सच्चाई का खुलासा करने वाली कांफ़्रेंसे आयोजित करके और इस अत्याचारी शासन के अत्याचारों की तस्वीरों की प्रदर्शनी लगा कर इन अत्याचारों पर अपना ऐतेराज़ दर्ज कराएं और लोगों तक सही ख़बरें पहुंचाएं ताकि जायोनी मीडिया के एकाधिकार को समाप्त किया जा सके। 2. हम सभी संभ्रांतों और इस्लामी जगत के बड़े उल्मा से अनुरोध करते हैं कि इन गंभीर हालात में इस्लामी एकता को मज़बूती प्रदान करें और मुहर्रम से लाभ उठाते हुए लोगों को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के मिशन से अवगत कराएं और उन्हें कर्बला के आंदोलन का अनुसरण करने, अनन्याय और अत्याचार के विरूद्ध खड़े होने और वर्तमान समय के यज़ीदियों से संघर्ष करने की प्ररणा दिलाएं। 3. हम समस्त अंतर-राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अनुरोध करते हैं कि अपने क़ानूनी कर्तव्य पर  अमल करें और इस अमानवीय कार्यवाही की निंदा करते हुए क्रियात्मक रूप से ठोस कदम उठाएं ताकि इस सिलसिले को रोका जा सके और मज़लूम फ़िलिस्तीनी राष्ट्र का समर्थन करें ताकि वह अपने अधिकारों को प्राप्त कर सकें। 4. इस्लामी सहयोग संगठन से हमें उम्मीद है कि वह तत्काल बैठक बुलाए और अपनी क्षमता भर फ़िलिस्तीन की पीड़ित जनता का समर्थन करे और सदस्य देशों, अंतर-राष्ट्रीय संगठनों उदाहरण स्वरूप संयुक्त राष्ट्र संघ, अरब लीग,गुट निरपेक्ष आंदोलन और उल्माए मुस्लेमीन संगठन के सदस्यों की कूटनीति को सक्रिय करते हुए सकारात्मक भूमिका के लिए मजबूर करे। 5. इस बीच हालिया आंदोलनों के नतीजे में सत्ता तक पहुंचने वाले शासकों जैसे त्युनिस मिस्र, लीबिया और यमन के इंक़ेलाबों के अधिकारियों की ज़िम्मेदारी दो बराबर है जो इन देशों के जवानों के ख़ून के नतीजे में सत्ता तक पहुंचे हैं। और ख़ास कर मिस्र की हुकूमत कि जिसके अधिकार में महत्वपूर्ण रफ़ह का रास्ता भी है औऱ कैम्प डेविड का शर्मनाक अनुबंध उसे पिछली शासन व्यवस्था से  विरासत मे